मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने और शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़े होने का है। उन्होंने कहा कि एक भयावह हादसे में जान गंवाने वाले नेता के निधन पर भी राजनीतिक बयान देना बेहद दुखद है। फडणवीस के अनुसार, वरिष्ठ नेता शरद पवार स्वयं यह साफ कर चुके हैं कि यह एक दुर्घटना थी, जिसमें दुर्भाग्यवश लोगों की जान गई, और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद इस तरह की बयानबाजी न केवल पीड़ादायक है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि राजनीति इस स्तर तक गिर चुकी है, जहां किसी व्यक्ति की मौत पर भी घृणित और ओछी राजनीति की जा रही है। उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लेते हुए कहा, “ममता दीदी का इस तरह का बयान देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह गलत है। यह देखकर बहुत दुख होता है कि राजनीति करने के लिए इतने निचले स्तर तक उतरा जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अजित पवार महाराष्ट्र के बेहद लोकप्रिय और जनप्रिय नेता थे। उनके निधन पर शोक जताने के बजाय, उनकी मौत को राजनीतिक रंग देना पूरे महाराष्ट्र की भावनाओं का अपमान है।
फडणवीस ने जोर देकर कहा कि ऐसे बयान दुख की इस घड़ी में लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और समाज में अविश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से अपील की कि वे अपने बयान पर पुनर्विचार करें और भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों से बचें।
वहीं सवाल यह भी है कि ममता बनर्जी ने ऐसा क्या कहा था, जिस पर इतना तीखा विवाद खड़ा हो गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अजित पवार के विमान हादसे को एक राजनीतिक साजिश से जोड़ते हुए बयान दिया था। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें अजित पवार की मौत की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश में राजनीतिक नेता भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि दो दिन पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि अजित पवार बीजेपी छोड़ने वाले हैं और इसके बाद यह हादसा हो गया। उन्होंने यह कहते हुए एजेंसियों पर सवाल उठाए कि उन्हें केवल सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, अन्य एजेंसियां समझौता कर चुकी हैं।
इसी बयान को लेकर अब महाराष्ट्र की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां शोक की घड़ी में संयम और संवेदनशीलता की अपील की जा रही है।